कान्हा का 5253वां जन्मोत्सव: अमेरिका से रूस तक कान्हा पहनेंगे ब्रज की पोशाक
1400 करोड़ के कारोबार में हिंदू-मुस्लिम एकता की अनूठी मिसाल
मथुरा/वृंदावन। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर धर्मनगरी मथुरा और वृंदावन में तैयारियां पूरे शबाब पर हैं। इस वर्ष कान्हा का 5253वां जन्मोत्सव अत्यंत हर्षोल्लास और भव्यता के साथ मनाने की रूपरेखा तैयार की गई है।
शहर के प्रमुख चौराहों को सजाया जा रहा है और दीवारों पर मनमोहक धार्मिक चित्रकारी की जा रही है। जन्मोत्सव पर भगवान के दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है, जिसे देखते हुए जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के भी पुख्ता इंतजाम किए हैं।
1400 करोड़ रुपये का वृहद पोशाक कारोबार
जन्माष्टमी के अवसर पर ठाकुरजी के विशेष श्रृंगार, पोशाक और मुकुट का व्यवसाय मथुरा-वृंदावन का प्रमुख आर्थिक आधार है। केवल जन्माष्टमी पर्व पर ही यहाँ पोशाक और श्रृंगार सामग्री का कारोबार लगभग 1400 करोड़ रुपये तक पहुँच जाता है। यह व्यवसाय उत्तर प्रदेश सरकार की 'लघु उद्योग कुटीर योजना' का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जन्माष्टमी से लगभग दो महीने पहले ही कारखानों में देश और दुनिया भर से आर्डर मिलने शुरू हो जाते हैं। बड़े-बड़े कारखानों से लेकर लोग अपने घरों में भी इस पुश्तैनी कार्य को करते हैं।
सात समुद्र पार कान्हा की पोशाकों की मांग
मथुरा में तैयार पोशाक और मुकुट केवल भारत तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इनकी मांग विदेशों में भी बड़े पैमाने पर है। अमेरिका, फ्रांस, इंग्लैंड, जापान, जर्मनी और रूस जैसे देशों में स्थित मंदिरों और कान्हा भक्तों द्वारा मथुरा की बनी पोशाकें मंगवाई जाती हैं। कारोबारियों का कहना है कि जब विदेशों में कान्हा पोशाक धारण करते हैं, तो श्रद्धालुओं का भाव और भक्ति चरम पर होती है, इसलिए गुणवत्ता और सुंदरता का विशेष ख्याल रखा जाता है।
सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करते कारीगर
मथुरा के जयसिंहपुरा और वृंदावन के गौरानगर क्षेत्र में स्थित 100 से अधिक कारखानों में हिंदू और मुस्लिम समाज के लोग एक साथ मिलकर काम करते हैं। यहाँ कई पीढ़ियों से मुस्लिम कारीगर ठाकुरजी के वस्त्र और मुकुट बनाने का काम कर रहे हैं। इस कार्य में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होता, बल्कि सभी कारीगर निष्ठा और तन्मयता के साथ कान्हा का श्रृंगार तैयार करते हैं। यहाँ तीज-त्योहारों से लेकर वस्त्र निर्माण तक, दोनों समुदाय एक-दूसरे के साथ मिलकर भाईचारे का संदेश देते हैं।
15-15 घंटे की बारीक कारीगरी
ठाकुरजी की पोशाक और मुकुट तैयार करने की प्रक्रिया अत्यंत जटिल और मेहनत भरी होती है। एक भव्य मुकुट तैयार करने में कारीगरों को करीब 15 घंटे का समय लगता है।
-
सामग्री: मखमल (वेलवेट) और रेशमी कपड़ों पर रेशम के धागों का उपयोग किया जाता है।
-
सजावट: वस्त्रों में हरे, पीले और लाल रंग के मोती, बारीक जरी का काम, नग और विशेष रूप से शीशे लगाए जाते हैं।
-
बारीकी: सिलाई और बुनाई इतनी बारीक होती है कि ज़रा सी नज़र हटने पर पूरी बनावट खराब होने का खतरा रहता है।
4 सितंबर की मध्य रात्रि 12:00 बजे जब मथुरा और वृंदावन के मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होगा, तब कान्हा इन्हीं हिंदू-मुस्लिम कारीगरों के हाथों से तैयार की गई भव्य और आकर्षक पोशाक धारण करेंगे।



