पश्चिम बंगाल में सरकारी शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य: 5 साल से ज्यादा सेवा बाकी तो देना होगा एग्जाम

  • Monday September 14 2026 - 12:58 AM
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  • प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के करीब 1 लाख से अधिक कार्यरत शिक्षकों पर पड़ेगा असर
  • तय समय सीमा में परीक्षा पास न करने पर रुक सकती है पदोन्नति, सेवा समाप्ति का भी खतरा

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में अब सरकारी स्कूलों में पहले से नौकरी कर रहे ऐसे शिक्षकों के लिए भी शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पास करना अनिवार्य होगा, जिन्होंने अभी तक यह परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है। राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग ने स्कूल सर्विस कमीशन (SSC) और प्राथमिक शिक्षा बोर्ड को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं। यह नियम प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत उन सभी शिक्षकों पर लागू होगा, जिनकी नौकरी में अभी पांच साल से अधिक का समय बाकी है।

किन शिक्षकों को देना होगा TET?

निर्देश के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के सभी कार्यरत शिक्षकों के लिए TET अनिवार्य नहीं किया गया है। जिन शिक्षकों की सेवा में अभी पांच साल से अधिक का समय शेष है और उन्होंने अब तक TET पास नहीं किया है, केवल उन्हें ही यह परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार ऐसे शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक TET पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। तय समय सीमा के भीतर परीक्षा पास न करने वाले शिक्षकों के खिलाफ सेवा नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

साल में दो बार हो सकती है परीक्षा

शिक्षकों को निर्धारित समय सीमा में परीक्षा पास करने का पर्याप्त अवसर देने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार हर साल शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित करेगी। आवश्यकता पड़ने पर साल में दो बार परीक्षा कराने का भी प्रावधान किया जा सकता है, जिनके बीच करीब छह महीने का अंतर रखा जाएगा। स्कूल शिक्षा विभाग ने SSC और प्राथमिक शिक्षा बोर्ड से इस व्यवस्था की रूपरेखा को लेकर जल्द ही रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।

TET पास न करने पर नौकरी पर मंडराएगा खतरा

जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि पात्र शिक्षक 31 अगस्त 2028 तक TET पास करने में असमर्थ रहते हैं तो उनकी सेवा प्रभावित होगी। ऐसे शिक्षकों को न केवल पदोन्नति (Promotion) से वंचित रखा जाएगा, बल्कि उनकी सेवा भी समाप्त की जा सकती है। इस फैसले से सबसे ज्यादा प्रभावित वे शिक्षक होंगे, जिनकी नियुक्ति उस समय हुई थी जब पश्चिम बंगाल में TET लागू या अनिवार्य नहीं था।

करीब 1 लाख शिक्षकों पर पड़ेगा सीधा असर

राज्य में पहले TET अनिवार्य न होने के कारण बड़ी संख्या में शिक्षकों की भर्ती बिना TET के ही हो गई थी। ऐसे शिक्षकों की अनुमानित संख्या करीब एक लाख बताई जा रही है। अब सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद इन सभी शिक्षकों को 2028 तक हर हाल में परीक्षा पास करनी होगी।


उत्तर प्रदेश: पहले से TET पास शिक्षकों को विशेष TET से राहत

दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में कार्यरत ऐसे शिक्षक जो पूर्व में ही TET पास कर चुके हैं, उन्हें राहत दी गई है। उन्हें विशेष TET देने की आवश्यकता नहीं होगी। यह विशेष परीक्षा केवल उन्हीं शिक्षकों के लिए आयोजित की जा रही है, जिन्होंने अब तक TET या CTET पास नहीं किया है। यूपी के बेसिक शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।

विशेष TET के लिए अनिवार्य पंजीकरण

अपर मुख्य सचिव (बेसिक व माध्यमिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा ने निर्देश दिए हैं कि जिन शिक्षकों ने अभी तक TET या CTET उत्तीर्ण नहीं किया है, उनका विशेष TET में शामिल होना अनिवार्य है। महानिदेशक (स्कूल शिक्षा) और निदेशक (बेसिक शिक्षा) को सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) के माध्यम से ऐसे शिक्षकों का पंजीकरण कराकर उन्हें परीक्षा में शामिल कराने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।