Raktveer Sanstha Blood Donation Mathura
मथुरा: थैलीसीमिया मुक्त अभियान के तहत 63वां रक्तदान शिविर संपन्न, 17 'रक्तवीरों' ने किया रक्तदान
मथुरा। 'थैलीसीमिया मुक्त मथुरा' के संकल्प को साकार करने की दिशा में रक्तवीर संस्था ने एक और सराहनीय कदम उठाया है। रविवार को गौरा नगर कॉलोनी स्थित चार संप्रदाय आश्रम में थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों की सहायता के लिए एक विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। बृजवासी चैरिटेबल ब्लड बैंक के सहयोग से आयोजित इस शिविर में 3 महिलाओं सहित कुल 17 लोगों ने उत्साहपूर्वक रक्तदान किया।
महंत ब्रज बिहारी दास महाराज ने किया शुभारंभ
शिविर का शुभारंभ महंत ब्रज बिहारी दास महाराज ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि रक्तदान एक ऐसा महादान है, जो सीधे तौर पर किसी जरूरतमंद को जीवनदान देता है। उन्होंने समाज के अन्य वर्गों से भी इस पुनीत कार्य में आगे आने का आह्वान किया।
थैलीसीमिया पीड़ितों के लिए 'संजीवनी' है रक्तदान
संस्था के संस्थापक मुकेश अग्रवाल ने बताया कि यह संस्था द्वारा आयोजित 63वां रक्तदान शिविर है। इसका मुख्य उद्देश्य थैलीसीमिया से ग्रसित बच्चों के लिए रक्त की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करना है। बृजवासी ब्लड बैंक के शुभम अग्रवाल और अंकुर गोयल ने साझा किया कि इन शिविरों के माध्यम से एकत्रित रक्त उन बच्चों के लिए 'संजीवनी' का काम करता है जिन्हें हर महीने रक्त बदलने की आवश्यकता होती है।
महिलाओं में दिखा विशेष उत्साह
शिविर की खास बात यह रही कि पहली बार रक्तदान करने वाली महिलाओं- खुशबू और गौरी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि रक्तदान करके उन्हें आत्मिक शांति और खुशी मिली है। वहीं, जतिन मिश्रा ने युवाओं का भ्रम दूर करते हुए कहा कि रक्तदान करने से शरीर में किसी भी प्रकार की कमजोरी नहीं आती, बल्कि यह स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है।
रक्तदाताओं को किया गया सम्मानित
शिविर में मुख्य रूप से रक्तदान करने वालों में राधावल्लभ वशिष्ठ, गोपाल वार्ष्णेय, ललित गौतम और शैलेश अग्रवाल शामिल रहे। गिरधर शर्मा और राधावल्लभ शर्मा ने सभी रक्तदाताओं को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने सुझाव दिया कि हर स्वस्थ व्यक्ति को साल में कम से कम दो बार रक्तदान अवश्य करना चाहिए।
उपस्थिति: इस अवसर पर प्रीति, अशोक अग्रवाल, पवन, निशा रानी, श्याम वशिष्ठ सहित संस्था के अनेक सेवाभावी सदस्य उपस्थित रहे।



