वृंदावन: अक्षय तृतीया पर ठाकुर बांकेबिहारी देंगे दुर्लभ 'चरण-सर्वांग' दर्शन, उमड़ेगा आस्था का सैलाब

  • Friday April 17 2026 - 01:43 PM
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वृंदावन। धर्मनगरी वृंदावन में अक्षय तृतीया (आखातीज) का पर्व इस बार अत्यंत विशेष होने जा रहा है। साल में केवल एक बार होने वाले ठाकुर श्रीबांकेबिहारी जी के श्रीचरणों के दर्शन और उनके चंदन लेपित सर्वांग स्वरूप की झलक पाने के लिए 20 अप्रैल को देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं का रेला ब्रज में जुटेगा।

इतिहासकार आचार्य प्रहलादबल्लभ गोस्वामी के अनुसार, इस पावन अवसर पर प्रभु को भीषण गर्मी से शीतलता प्रदान करने के लिए विशेष चंदन सेवा अर्पित की जाएगी।

दर्शन का विशेष समय और विधान

  • अक्षय तृतीया के दिन मंदिर की परंपराएं बदल जाती हैं। इस दिन की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
  • चरण दर्शन: सुबह की पाली में भक्त ठाकुरजी के श्रीचरणों के दर्शन कर सकेंगे।
  •  सर्वांग दर्शन: शाम के समय प्रभु के पूरे विग्रह (शरीर) के दर्शन होंगे, जो चंदन से लेपित होंगे।

 दिव्य प्रसादी: ठाकुरजी के चरणों में अर्पित चंदन को सुखाकर छोटी गोलियां बनाई जाती हैं। मान्यता है कि यह चंदन असाध्य रोगों का निवारक है। इसे लगाने के लिए नहीं, बल्कि ग्रहण करने (खाने) के लिए दिया जाता है।

कुंवारे मांगेंगे मनौती, अर्पित करेंगे स्वर्ण-रजत 'चरण चौकी'

ऐसी मान्यता है कि इस दिन प्रभु को सोने या चांदी की पायल और चरण चौकी अर्पित करने से विवाह की बाधाएं दूर होती हैं। हर साल सैकड़ों अविवाहित युवक-युवतियां अपनी वैवाहिक मनौती लेकर बिहारीजी के दरबार में हाजिरी लगाते हैं।

100 किलो चंदन और केसर का अनूठा भोग

उत्सव की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि  कर्नाटक से मंगवाए गए 100 से 150 किलो उत्तम चंदन को गुलाबजल के साथ घिसा जा रहा है। इसमें कश्मीरी केसर, कन्नौजी इत्र और कपूर मिलाकर बड़े-बड़े चंदन के लड्डू (गोले) तैयार किए गए हैं, जिन्हें प्रभु के चरणों में रखा जाएगा।  भोग में सतुआ के लड्डू, ठंडाई, शरबत और शीतल फलों का विशेष अर्पण होगा।

तिथि को लेकर संशय दूर: 20 अप्रैल को मनेगा मुख्य उत्सव

आचार्य गोस्वामी ने स्पष्ट किया कि अक्षय तृतीया तिथि 19 अप्रैल की सुबह 10:49 बजे से शुरू होकर 20 अप्रैल की सुबह 07:27 बजे तक रहेगी। उदय तिथि की महत्ता के कारण श्रीबांकेबिहारी मंदिर सहित अधिकांश प्रमुख मंदिरों में 20 अप्रैल को ही महोत्सव मनाया जाएगा।

क्या करें और क्या न पहनें? (विशेष सुझाव)

इतिहासकार आचार्य प्रहलादबल्लभ गोस्वामी ने भक्तों के लिए कुछ पारंपरिक सुझाव भी दिए हैं:

शुभ रंग: पूजा के समय सुनहरे, पीले, लाल या नारंगी रंग के वस्त्र पहनना शुभ है। ये रंग समृद्धि और मां लक्ष्मी के प्रतीक हैं।

 वर्जित: शुभ कार्यों में काले रंग के वस्त्रों से परहेज करना चाहिए।

 खरीददारी: इस दिन सोना, जौ, पीली सरसों या नमक खरीदना अत्यंत फलदायी माना जाता है। नमक खरीदने से घर की नकारात्मकता दूर होती है और बरकत बनी रहती है।

"अक्षय तृतीया का अर्थ है जिसका कभी क्षय न हो। इस दिन किया गया दान, विशेषकर विद्या दान और अन्न दान, मनुष्य के लोक और परलोक दोनों सुधार देता है।"

— आचार्य प्रहलादबल्लभ गोस्वामी, सेवायत