कब मनाएं दिवाली 31 अक्टूबर को या 1 नवंबर को, प्रमुख मंदिरों में कब ? जानिए

  • Wednesday October 23 2024 - 11:37 PM
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मथुरा। इस साल दो दिन दिवाली मनाई जायेगी। कुछ लोग 31 तो कुछ लोग 1 नवंबर को दीवाली मनाएंगे। दिवाली पांच दीवसीय उत्सव है जो धनतेरस से शुरू होकर भैया दूज पर समाप्त होती है। धनतेरस को नई धातु की वस्तुओं, विशेष रूप से सोने और चांदी जैसी धातुओं को खरीदने और लाने के लिए एक शुभ दिन माना जाता है।

रोशनी का त्यौहार दिवाली आने वाला है। यह हिंदुओं के प्रमुख त्यौहारों में से एक है, जिसे पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। लोग अपने घरों को तरह-तरह की रोशनी से सजाते हैं। दीवाली पांच दिनों का उत्सव है जो धनतेरस से शुरू होता है और भैया दूज पर समाप्त होता है। धनतेरस को नई धातु की वस्तुएं, विशेष रूप से सोना और चांदी जैसी धातुएं खरीदने और लाने के लिए एक शुभ दिन माना जाता है।

पांच दिवसीय उत्सव के दौरान, विभिन्न अनुष्ठानों का पालन किया जाता है और देवी लक्ष्मी के साथ कई अन्य देवी-देवताओं की पूजा की जाती है। अमावस्या का दिन, जिसे अमावस्या के रूप में जाना जाता है, दीवाली उत्सव के पांच दिनों में सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है और इसे लक्ष्मी पूजा, लक्ष्मी-गणेश पूजा और दिवाली पूजा के रूप में जाना जाता है। पं.अजय कुमार तैलंग ज्योतिषाचार्य ने बताया कि पंचांग के अनुसार व बल्लव कुल सम्प्रदाय की टिप्पणी के अनुसार 1 नवबंर को अमावस्या तिथि प्रदोष और निशिता काल को स्पर्श नहीं कर रही है जबकि 31 अक्टूबर को अमावस्या तिथि प्रदोष काल से लेकर निशिता काल तक व्याप्त रहेगी। साथ ही 1 नवंबर को आयुष्मान योग और स्वाति नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है ।ले्किन, तिथियों और पंचांग के अनुसार, इस बार 31 अक्टूबर को ही दिवाली मनाना ज्यादा शुभ रहेगा।

अयोध्या, काशी और मथुरा के मंदिरों में दिवाली कब, जानिए 

अयोध्या में दिवाली का पर्व 1 नवंबर को मनाया जाएगा। जबकि, मथुरा एवं काशी के पंडितों के मुताबिक, दिवाली 31 अक्टूबर को मनाना ही फलदायी रहेगा। साथ ही, वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर, नाथद्वार श्रीनाथजी मंदिर, तिरुपति देवस्थानम और द्वारकाधीश में भी दिवाली का पर्व 31 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा। उज्जैन के ज्योतिर्विदों के अनुसार, 31 अक्टूबर को अमावस्या प्रदोष काल में ही मनाना सही रहेगा।

दीवाली पर पूर्व दिशा या ईशान कोण में एक चौकी रखें। चौकी पर लाल या गुलाबी वस्त्र बिछाएं. पहले गणेश जी की मूर्ति रखें। फिर उनके दाहिने और लक्ष्मी जी को रखें। आसन पर बैठें और अपने चारों और जल छिड़क लें। इसके बाद संकल्प लेकर पूजा आरम्भ करें। एक मुखी घी का दीपक जलाएं फिर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश को फूल और मिठाइयां अर्पित करें।

लक्ष्मी-गणेश पूजन का शुभ विशेष मुहूर्त 

गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है. इस बार लक्ष्मी पूजा का शुभ विशेष मुहूर्त 31 अक्टूबर 2024 को शाम 5 बजे से लेकर रात के 10 बजकर 30 मिनट तक है।

माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु को भोग में खीर, बूंदी के लड्डू, सिंघाड़ा, अनार, नारियल, पान का पत्ता, हलवा, मखाने, सफेद रंग की मिठाई, खील, चूरा, इलायची दाने का भोग खील वतासे, कमलगट्टा, सिंदूर आदि से पूजा की जाती है । 

अब के दीपावली पर विशेष पूजन मुहूर्त 

1- परिवार सहित पूजन समय सायं 6-30

2- डाक्टर, इंजीनियर समय सायं 8-30

3-लेखाविभाग/प्रशासनिक समय 9-00

4-वकील/पुलिस विभाग समय 9-30

5-संगीत कलाकार समय 10-00

6-मंदिर पुजारी समय सायं 6-00

7-मीडिया विभाग सायं 7-00

8-कारखाना/फैक्ट्री दोपहर 3-00

9-व्यापारी, उद्योगपति रात्रि 11-40

10-अन्य सभी के लिए 5-00 से 10-00तक  शुभ है ।