वृंदावन के रंग मंदिर ब्रह्मोत्सव में पंचम दिवस: भगवान रंगनाथ ने धारण किया मोहिनी स्वरूप, रजत पालकी में निकली सवारी

  • Tuesday March 17 2026 - 11:05 PM
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वृंदावन। तीर्थ नगरी वृंदावन स्थित प्रसिद्ध श्री रंगनाथ मंदिर के दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव में पंचम दिवस भगवान रंगनाथ ने मोहिनी स्वरूप धारण कर भक्तों को दिव्य दर्शन दिए। इस दौरान ठाकुरजी रजत निर्मित पालकी में विराजमान होकर भव्य शोभायात्रा के रूप में निकले, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े।

बुधवार को आयोजित ब्रह्मोत्सव के पांचवें दिन श्री रामानुज संप्रदाय के प्रमुख दिव्यदेश श्रीरंग मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के बाद गर्भगृह से भगवान रंगनाथ को स्वर्णाभूषणों से अलंकृत कर रजत पालकी में विराजमान किया गया। इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच कुंभ आरती उतारी गई। इसके पश्चात बैंड बाजों और दक्षिण भारतीय पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि के बीच भगवान की सवारी निकाली गई, जो श्री वैष्णव संप्रदाय के प्रमुख मंदिरों और स्थलों से होते हुए रंगजी के बड़ा बगीचा पहुंची। यहां कुछ समय विश्राम के बाद ठाकुर जी की सवारी पुनः विभिन्न वैष्णव मंदिरों में दर्शन देने पहुंची।

चांदी की पालकी में मोहिनी रूप में विराजमान भगवान गोदारंगमन्नार। 

 

समुद्र मंथन की कथा से जुड़ा है मोहिनी स्वरूप

पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के समय मोहिनी रूप धारण किया था। इस अद्भुत रूप से उन्होंने असुरों को मोहित कर देवताओं को अमृत पान कराया था। भगवान का यह स्वरूप धर्म की विजय और अधर्म पर सत्य की जीत का प्रतीक माना जाता है।

श्री रंग मंदिर में पुष्करणी में विराजमान भगवान गोदारंगमन्नार। 

 

मोहिनी स्वरूप के दर्शन का आध्यात्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान के मोहिनी स्वरूप के दर्शन करने से भक्तों का मन मोह-माया से हटकर भक्ति मार्ग की ओर अग्रसर होता है। यह स्वरूप भक्तों को वैराग्य और आध्यात्मिक जीवन की प्रेरणा देता है। ब्रह्मोत्सव के दौरान मंदिर परिसर "गोविंदा-गोविंदा" और "रंगनाथ भगवान की जय" के जयकारों से गूंज उठा। आयोजन में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ प्राप्त किया।