मथुरा का 'जोधपुर झाल' बना विदेशी मेहमानों का नया ठिकाना: पहली बार दिखीं 'कसाई पक्षी' की 5 दुर्लभ प्रजातियां

  • Saturday April 04 2026 - 01:37 PM
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  • रूस और मंगोलिया से हजारों मील का सफर तय कर ब्रज पहुंचे 'बुचर बर्ड्स', जानें क्यों कहते हैं इन्हें शिकारी पक्षी?

मथुरा (फरह)। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद और वन विभाग के साझा प्रयासों से विकसित हो रहा जोधपुर झाल वेटलैंड अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पक्षी प्रेमियों के आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। हाल ही में हुए शीतकालीन पक्षी सर्वेक्षण (Winter Bird Survey) में वैज्ञानिकों ने यहाँ एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। यहाँ श्राइक (Shrike), जिसे आम भाषा में 'कसाई पक्षी' कहा जाता है, की पांच अलग-अलग प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की गई है।

मध्य एशिया और रूस से पहुंचे 'प्रवासी मेहमान'

बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डवलपमेंट सोसाइटी के ईकोलॉजिस्ट डॉ. केपी सिंह के नेतृत्व में किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि यहाँ न केवल स्थानीय बल्कि विदेशी प्रवासी पक्षियों ने भी डेरा डाल दिया है।

  •  प्रवासी प्रजातियाँ: मध्य और पूर्वी एशिया (रूस, मंगोलिया, कजाकिस्तान) से लंबी दूरी तय कर ग्रेट-ग्रे श्राइक, इसेबिलाइन श्राइक, और ब्राउन श्राइक यहाँ पहुंचे हैं।
  •  आवासीय प्रजातियाँ: स्थानीय स्तर पर पाई जाने वाली बे-बैक्ड श्राइक और लोंग-टेल्ड श्राइक भी यहाँ भारी संख्या में मौजूद हैं।

इन्हें 'कसाई पक्षी' या 'बुचर बर्ड' क्यों कहा जाता है?

श्राइक पक्षी अपने सुंदर रूप के पीछे एक माहिर शिकारी का स्वभाव छिपाए रखते हैं। इनकी कुछ विशेषताएं इन्हें अन्य पक्षियों से बिल्कुल अलग बनाती हैं:

  • शिकार का अनोखा तरीका: ये पक्षी अपने शिकार (कीट, छिपकली, चूहे) को पकड़कर कांटेदार झाड़ियों या नुकीले तारों में फंसा देते हैं, जैसे किसी कसाई की दुकान पर मांस टंगा हो। इसी व्यवहार के कारण इन्हें 'बुचर बर्ड' कहा जाता है।
  • मांसाहारी गायक: पैसराइन परिवार (गायक पक्षी) का होने के बावजूद इनका मुख्य भोजन मांस है।
  • विशिष्ट पहचान: इनका शरीर धूसर और सफेद होता है, लेकिन आँखों के पास एक चौड़ी काली पट्टी होती है जो 'मुखौटे' जैसी दिखाई देती है।
  • नकल करने में माहिर: ये पक्षी अन्य प्रजातियों की आवाज निकालने में भी सक्षम होते हैं।

जोधपुर झाल: ब्रज का नया 'इको-टूरिज्म' हब

डॉ. केपी सिंह के अनुसार, जोधपुर झाल में इन पाँच प्रजातियों का एक साथ मिलना इस बात का प्रमाण है कि यहाँ का पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) बेहद समृद्ध हो चुका है। झाड़ीदार घास के मैदान और वेटलैंड का संगम इन पक्षियों के लिए भोजन और विश्राम का सबसे सुरक्षित स्थान बन गया है।

विशेषज्ञों की राय:

 "जोधपुर झाल अब केवल एक जल स्रोत नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण 'स्टॉप-ओवर' स्थल बन गया है। उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद द्वारा किए जा रहे संरक्षण कार्य रंग ला रहे हैं।"

फैक्ट फाइल: श्राइक पक्षी (Laniidae Family)

  • आकार: 16 से 25 सेंटीमीटर।
  • पसंदीदा स्थान: ऊंचे पेड़, बिजली के तार और कटीली झाड़ियाँ।
  • स्वभाव: अत्यंत सतर्क और आक्रामक शिकारी।
  • महत्व: कीटों की संख्या नियंत्रित कर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मददगार।