कदंब वृक्ष पर विराजे भगवान गोदारंगमन्नार
श्रीरंग मंदिर ब्रह्मोत्सवः कदंब वृक्ष पर विराजे भगवान गोदारंगमन्नार, भक्तों को दिए दिव्य दर्शन
वृंदावन। दक्षिण भारती शैली के उत्तर भारत के विशाल रंग मंदिर में चल रहे 177वें ब्रह्मोत्सव के चौथे दिन मंगलवार की शाम भगवान गोदारंगमन्नार कदंब वृक्ष पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देने मंदिर से निकले। शाम 7.30 से 10.30 बजे तक निकली इस दिव्य सवारी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े और भक्ति भाव से भगवान की आराधना की।
मंदिर परंपरा के अनुसार ब्रह्मोत्सव के दौरान भगवान की विभिन्न वाहनों पर सवारी निकलती है, जिनका गहरा धार्मिक और पौराणिक महत्व है। कदंब वृक्ष पर विराजमान भगवान की यह सवारी भगवान श्रीकृष्ण की प्रसिद्ध लीलाओं की स्मृति में निकाली जाती है।
पौराणिक मान्यता
ब्रज में भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के वस्त्र चुराकर कदंब के वृक्ष पर चढ़कर दिव्य लीला की थी। इस लीला के माध्यम से भगवान ने अपने भक्तों के बीच आने वाले सभी आवरणों और अहंकार को दूर कर उन्हें परम मुक्ति का मार्ग दिखाया। इसी लीला के प्रतीक रूप में ब्रह्मोत्सव में कदंब वृक्ष पर विराजमान भगवान की सवारी निकाली जाती है। मंदिर परंपरा के अनुसार यह सवारी भगवान की उसी लीला का स्मरण कराती है और इसके दर्शन से भक्तों के जाने-अनजाने अपराधों का क्षय होता है तथा मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
सवारी के बड़े बगीचा पहुंचने पर भगवान गोदारंगमन्नार ने कुछ समय के लिए विश्राम किया; इस दौरान ओडिसी नृत्यांगना ने कुंजलता मिश्रा ने सहकलाकारों के साथ भगवान की लीलाओं का ओडिसी नृत्य के माध्यम से प्रस्तुत किया। जिसे देख सैकडों भक्तों का मनमयूर नृत्य करने लगा।



