केसी घाट
यमुना के कायाकल्प का महाभियान: वृंदावन में 'साइंटिफिक मॉडल' से निर्मल होगी कालिंदी, जलमार्ग विकास की भी तैयारी
- केसी घाट से देवरहा बाबा घाट तक होगा वैज्ञानिक ट्रायल
- प्रदूषण नियंत्रण, जलमार्ग विकास और भू-वैज्ञानिक मैपिंग से बनेगी कार्ययोजना
मथुरा। वृंदावन में यमुना नदी को स्वच्छ, सुंदर और व्यवस्थित बनाने की दिशा में अब ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसके तहत केसी घाट से देवरहा बाबा घाट तक यमुना के दोनों किनारों की जियोलॉजिकल मैपिंग कराई जाएगी। इस वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर यमुना के जल को प्रदूषण मुक्त करने, जल प्रवाह को बेहतर बनाने तथा जलमार्ग विकसित करने की व्यापक योजना तैयार की जाएगी।
इस संबंध में सोमवार को उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सभागार में परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जल संरक्षण और पर्यावरण सुधार के लिए वैज्ञानिक उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई।
ग्लोबल विकास ट्रस्ट के संस्थापक मयंक गांधी ने यमुना जल की गुणवत्ता सुधारने के लिए आवश्यक वैज्ञानिक डेटा एकत्र करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित अध्ययन में यमुना की वर्तमान स्थिति, नदी में जमी सिल्ट, जल प्रवाह की स्थिति तथा प्रदूषण के स्रोतों का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा, जिससे प्रभावी कार्ययोजना बनाई जा सके।
वैज्ञानिक कसौटी पर यमुना: अब तकनीक से होगा सुधार
ब्रज तीर्थ विकास परिषद की उच्च स्तरीय बैठक में यमुना की वर्तमान स्थिति पर गहन मंथन हुआ।
जियोलॉजिकल मैपिंग और डेटा संकलन: ग्लोबल विकास ट्रस्ट के सहयोग से केसी घाट से लेकर देवरहा बाबा घाट तक यमुना की जियोलॉजिकल मैपिंग की जाएगी। इसमें नदी के तल में जमा सिल्ट (गाद), जल प्रवाह की दिशा और प्रदूषण के सटीक कारणों का वैज्ञानिक अध्ययन होगा।
पायलट प्रोजेक्ट: परिषद ने तय किया है कि पहले चरण में चयनित क्षेत्र में वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर कार्ययोजना लागू होगी। यदि यह ट्रायल सफल रहता है, तो इसे संपूर्ण ब्रज क्षेत्र में यमुना के तटों पर विस्तार दिया जाएगा।
जलमार्ग की संभावना: इस अध्ययन का एक मुख्य उद्देश्य यमुना में सुगम जलमार्ग विकसित करना है, जिससे भविष्य में धार्मिक पर्यटन को नई गति मिल सके।
परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र ने निर्देश दिए कि पहले चरण में केसी घाट से देवरहा बाबा घाट तक ट्रायल प्रोजेक्ट के रूप में यह अध्ययन कराया जाए। इसके बाद प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर विस्तृत योजना लागू की जाएगी।
जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने सिंचाई विभाग सहित संबंधित सभी विभागों को इस कार्य में पूर्ण सहयोग और आपसी समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए ताकि परियोजना को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा सके।
बैठक में मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष लक्ष्मी एन, मुख्य विकास अधिकारी पूजा गुप्ता, रविंद्र चामड़िया, ब्रज तीर्थ विकास परिषद के एसीईओ मदन चंद दुबे, पर्यावरण विशेषज्ञ मुकेश शर्मा, डिप्टी सीईओ सतीश चंद्र, उप निदेशक कृषि, जिला कृषि अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी, जलकल विभाग के मुख्य अभियंता तथा सिंचाई विभाग के अभियंता सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।



