थायरॉइड की बीमारी से बिगड़ सकता है मानसिक स्वास्थ्य,
थायरॉइड की बीमारी से बिगड़ सकता है मानसिक स्वास्थ्य, डॉक्टरों ने बताए लक्षण
थायरॉइड की समस्या आज के समय में काफी ज्यादा आम हो चुकी है। बावजूद इसके ज्यादातर लोग इस बात से अभी भी अनजान ही हैं कि इस ग्रंथि से जुड़ी गड़बड़ी मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालती है। सोचने में परेशानी, डिप्रेशन, मूड में बदलाव जैसी कई चीजें थॉयरॉइड कार्यप्रणाली में समस्या का नतीजा हो सकते हैं। मेरे पास अक्सर ऐसे मरीज आते हैं, जो किसी न किसी प्रकार के मेंटल हेल्थ स्ट्रगल का सामना कर रहे होते हैं और जब हम उनके टेस्ट करवाते हैं, तो स्थिति बिगड़नी की वजह थायरॉइड ग्लैंड में गड़बड़ी निकलकर आती है।
क्या है थायरॉइड?
थायरॉइड गर्दन के निचले हिस्से में स्थित एक छोटी तितली के आकार की ग्रंथि है। इससे निकलने वाले हार्मोन मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा के स्तर, दिल की धड़कन और शरीर के तापमान को नियंत्रित करते हैं। इसके साथ ही ये दिमाग के काम करने और भावनात्मक सेहत के संचालन में भी अहम भूमिका निभाते हैं। थायरॉइड ग्रंथि अगर ठीक से काम न करे, तो इससे मेंटल हेल्थ पर असर पड़ना शुरू हो जाता है।
कौन सी चीजें थायरॉइड पर डालती हैं असर
हाशिमोटो थायरॉइडाइटिस और ग्रेव्स रोग जैसी ऑटोइम्यून डिजीज थायरॉइड की कार्यप्रणाली में गड़बड़ी के सबसे आम कारणों में शामिल हैं। इसके अलावा कुछ खास दवाओं का सेवन भी इसे बिगाड़ सकता है। थायरॉइड को बिगाड़ने में निम्नलिखित स्थितियां भी जिम्मेदार साबित हो सकती हैं:
- आयोडीन का असंतुलन
- क्रोनिक स्ट्रेस
- हार्मोनल चेंज
- परिवार में थायरॉइड हिस्ट्री
- मेनोपॉज
- प्रेग्नेंसी के दौरान हार्मोनल चेंज
- डिलीवरी के बाद होने वाला हार्मोनल चेंज
इनके चलते व्यक्ति को अपने भावनात्मक स्वास्थ्य और सोचने-समझने की क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ता महसूस हो सकता है।
थायरॉइड हार्मोन का ब्रेन से कनेक्शन
थायरॉइड हार्मोन, थायरॉक्सिन और ट्राईआयोडोथायरोनिन , जिन्हें T4, T3 के नाम से भी जाना जाता है, सीधे तौर पर ब्रेन के केमिकल बैलेंस पर असर डालते हैं। ये हार्मोन सेरोटोनिन और डोपामाइन जैसे न्यूरोट्रांसमीटर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
व्यक्ति अगर जब हाइपोथायरॉइडिज्म (थायरॉइड हार्मोन के स्तर में कमी) और हाइपरथायरॉइडिज्म (थायरॉइड हार्मोन का स्तर में बढ़ोतरी) से प्रभावित होता है, तो उसके दिमाग के सामान्य कामकाज में रुकावट पैदा होने लगती है। इसी के चलते उसके मूड, सोचने के तरीके और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं में बदलाव आता दिख सकता है। कभी-कभी ये स्थितियां ऐसे साइकोलॉजिकल सिम्प्टम्स को जन्म दे देती हैं कि एक्सपर्ट की मदद की जरूरत आन पड़ती है।
थायरॉइड के कारण मेंटल हेल्थ बिगड़ने के लक्षण
थायरॉइड ग्रंथि की कम सक्रियता या अधिक सक्रियता के आधार पर मानसिक स्वास्थ्य समस्या संबंधी लक्षण अलग हो सकते हैं। हाइपोथायरॉइडिज्म की स्थिति में:
- लगातार थकान महसूस होना
- उदासी बने रहना
- अवसाद
- सोचने की क्षमता धीमे होने लगना
- याददाश्त संबंधी समस्याएं आना
- मोटिवेशन में कमी आना।
- थायरॉइड डाल सकता है मेंटल हेल्थ पर असर
- हाइपरथायरॉइडिज्म की स्थिति में:
- चिंता
- चिड़चिड़ापन
- बेचैनी
- मूड स्विंग्स
- ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
- नींद से जुड़ी समस्याएं।
कुछ व्यक्तियों को थायरॉइड ग्लैंड से जुड़ी समस्याओं के चलते पैनिक अटैक या बहुत ज्यादा भावनात्मक संवेदनशीलता महसूस करना जैसी समस्याओं का सामना भी करना पड़ सकता है। आमतौर पर ये सारे लक्षण मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स से मेल खाते हैं, इसलिए अक्सर ही थायरॉइड की इनमें भूमिका को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
थायरॉइड की जटिलताओं को कैसे करें कम
थायरॉइड से जुड़ी सभी बीमारियों को रोका नहीं जा सकता, लेकिन समय पर पहचान और हेल्दी लाइफस्टाइल से इससे जन्म लेने वाले कॉम्प्लिकेशन्स को कम जरूर किया जा सकता है।
- स्ट्रेस मैनेजमेंट सीखें
- पर्याप्त नदीं लें
- फिजिकली एक्टिव बने रहें
- रेग्युलर टेस्ट करवाते रहें
- थायरॉइड टेस्टिंग वो लोग जरूर करवाएं, जिनके परिवार में इसकी हिस्ट्री रही है
- थायरॉइड की दवा खुद से खाना न छोड़ें
- बिना परामर्श दवाई या किसी प्रकार का सप्लीमेंट लेने से बचें
हेल्दी डाइट लें, जिसमें आयोडीन, सेलेनियम और जिंक तत्व शामिल हों। ये थायरॉइड को हेल्दी बनाए रखने में मददगार साबित होते हैं लक्षण दिखने पर तुरंत मेडिकल सहायता लें। इनके इलाज में देरी मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर ज्यादा नकारात्मक असर डालती है।
थायरॉइड के मरीज ये बातें रखें ध्यान
ऐसे लोग जिन्हें पहले से थायरॉइड है, उन्हें डॉक्टरी परामर्श लेना और उनकी सलाह का पालन करना बेहद आवश्यक है। इसके अलावा दवाइयां सही समय और नियमित रूप से लेना व रेग्युलर थायरॉइड टेस्टिंग करवाना, हार्मोन के लेवल को ट्रैक एंड कंट्रोल में रखने में सहायता करते हैं। अनहेल्दी फूड्स, सेडेंटरी लाइफस्टाइल और पर्याप्त नींद न लेना जैसी आदतों से दूरी थायरॉइड के कामकाज और मानसिक स्वास्थ्य को हेल्दी बनाए रखने में मददगार साबित हो सकती है।
थायरॉइड से जुड़ी समस्या का कैसे होता है इलाज
थायरॉइड का ट्रीटमेंट कैसा होगा ये उसके प्रकार और गंभीरता पर निर्भर करता है। हाइपोथायरॉइडिज्म के मामले में आमतौर पर थायरॉइड हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी दी जाती है। इससे हार्मोन का स्तर सामान्य होता है, जो मूड व सोचने-समझने की क्षमता में सुधार लाता है।
हाइपरथायरॉइडिज्म होने पर ऐसी दवाएं दी जाती हैं, जो हार्मोन प्रोडक्शन को कम कर सके। इसके अलावा रेडियोएक्टिव आयोडीन थेरेपी, या कुछ मामलों में सर्जरी के विकल्प को भी चुना जाता है। अगर थायरॉइड पेशेंट में डिप्रेशन, एंग्जायटी, इमोशनल डिस्ट्रेस जैसी मेंटल हेल्थ से जुड़ी समस्याएं दिखाई देने लगती हैं, तो उन्हें काउंसलिंग और थेरेपी के लिए भेजा जाता है।



