श्री रंग मंदिर ब्रह्मोत्सव: शेषनाग वाहन पर विराजे भगवान गोदा रंगमन्नार

  • Wednesday March 11 2026 - 01:36 AM
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वृंदावन। उत्तर भारत के विशाल श्रीरंग मंदिर में चल रहे दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव के चतुर्थ दिवस मंगलवार की प्रातःकालीन सवारी में भगवान श्री गोदा रंगमन्नार चाँदी से निर्मित शेषनाग वाहन पर विराजमान होकर भक्तों को दिव्य दर्शन देने निकले। इस भव्य सवारी के दर्शन कर श्रद्धालु भक्तिभाव से सराबोर हो उठे।

पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान लक्ष्मीपति श्रीनारायण वैकुण्ठ लोक और क्षीरसागर में शेषनाग की शैया पर विराजमान रहते हैं। सृष्टि के पालनकर्ता भगवान नारायण अपनी समस्त सृष्टि के कल्याण हेतु शेषनाग के आसन पर विराजते हैं। इसी दिव्य स्वरूप की झलक ब्रह्मोत्सव के दौरान निकलने वाली शेषनाग वाहन सवारी में देखने को मिलती है।

धार्मिक मान्यता 

शेषनाग को “अनंत” भी कहा जाता है। यह वही दिव्य स्वरूप है जो सृष्टि के प्रलय के बाद भी शाश्वत माना जाता है। श्रीमद्भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है- “अनन्तश्चास्मि नागानाम्”, अर्थात नागों में मैं अनंत हूँ। माना जाता है कि शेषनाग वाहन पर विराजमान भगवान गोदा रंगमन्नार के दर्शन मात्र से भक्तों को वैकुण्ठ लोक की प्राप्ति तथा पितरों की सद्गति का पुण्य मिलता है।

हनुमानजी पर विराजमान होकर निकली श्रीरंगनाथ की सवारी 

 

हनुमानजी पर विराजे श्रीरंगनाथ की सवारी 

ब्रह्मोत्सव के तृतीय दिवस की देर शाम भगवान श्री रंगनाथ स्वर्ण निर्मित पवनपुत्र हनुमानजी के कंधों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए निकले। सवारी जब बड़े बगीचा मैदान पहुँची तो वहां भव्य आतिशबाजी का आयोजन किया गया, जिसे देखकर श्रद्धालु रोमांचित हो उठे।

पौराणिक मान्यता 

हनुमान जी ने स्वयं को “दासोऽहम् कौशलेन्द्रस्य” कहकर भगवान श्रीराम का सेवक बताया है। हनुमान जी सदैव अपने प्रभु की सेवा के लिए तत्पर रहते हैं। इसी भाव के प्रतीक स्वरूप ब्रह्मोत्सव में भगवान रंगनाथ की सवारी हनुमान वाहन पर निकलती है। स्वर्ण निर्मित हनुमान वाहन पर विराजित भगवान रंगनाथ के दर्शन को अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। मान्यता है कि इस स्वरूप के दर्शन से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं तथा विजय और वैभव की प्राप्ति होती है।

सवारी के दौरान बड़े बगीचा मैदान में लगभग आधे घंटे तक रंगीन आतिशबाजी हुई, जिससे पूरा आकाश प्रकाश और रंगों से जगमगा उठा। इस आकर्षक आतिशबाजी को “छोटी आतिशबाजी” के नाम से जाना जाता है, जिसका भक्तों ने भरपूर आनंद लिया।