रंगनाथ मंदिर ब्रह्मोत्सव: स्वर्ण गरुड़ वाहन पर निकले भगवान, भक्तों ने किए भावपूर्ण दर्शन

  • Wednesday March 11 2026 - 01:21 AM
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वृंदावन। उत्तर भारत के विशालतम श्रीरंग मंदिर में चल रहे दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव के तीसरे दिन सोमवार को भगवान रंगनाथ स्वर्ण निर्मित गरुड़ वाहन पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देने निकले। गरुड़ वाहन पर विराजित भगवान के दर्शन कर श्रद्धालु भक्ति और आनंद के रस में सराबोर हो गए।

ब्रह्मोत्सव के तीसरे दिन प्रातःकाल भगवान रंगनाथ की भव्य सवारी रथ मंडप से वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि के बीच निकली। स्वर्ण निर्मित गरुड़ वाहन पर विराजमान भगवान की सवारी पुष्करणी के समीप पूर्वी द्वार तक पहुंची, जहां परंपरा के अनुसार लगभग एक घंटे तक सवारी को विराम दिया गया।

मंदिर परंपरा के अनुसार पूर्वी द्वार पर सवारी रोकने के पीछे एक प्राचीन मान्यता है। कहा जाता है कि दक्षिण भारत के भगवान के अनन्य भक्त दूधा स्वामी हर वर्ष ब्रह्मोत्सव में गरुड़ वाहन के दर्शन के लिए आते थे। एक वर्ष अस्वस्थ होने के कारण वे नहीं आ सके। उस समय भगवान की सवारी के दौरान अचानक भगवान गरुड़ वाहन से अदृश्य हो गए। मंदिर में पर्दा डाल दिया गया और पुजारियों ने प्रार्थना की। जब कुछ समय बाद पर्दा हटाया गया तो भगवान पुनः गरुड़ वाहन पर विराजमान दिखाई दिए। बाद में यह माना गया कि भगवान अपने भक्त को दर्शन देने स्वयं उनके स्थान पर गए थे। तभी से इस परंपरा के तहत सवारी को लगभग एक घंटे तक द्वार पर रोका जाता है।

शास्त्रों के अनुसार पक्षीराज गरुड़ वेदों की आत्मा माने जाते हैं और उनके पंखों से सामवेद का गायन होता है। ऐसे स्वर्ण निर्मित गरुड़ पर वेदवैद्य भगवान का विराजमान होना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस वाहन के दर्शन से क्रूर ग्रहों की शांति, दुरूस्वप्नों का नाश तथा वेद पाठ के समान पुण्य की प्राप्ति होती है। इस अवसर पर शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति देते हुए वासुदेवन श्रीधर ने अपनी कला के माध्यम से भगवान की आराधना की, जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठा।

रजत निर्मित हंस वाहन पर विराजमान भगवान गोदा रंगमन्नार 

 

दूसरे दिन शाम को हंस वाहन पर निकली सवारी

इससे पूर्व ब्रह्मोत्सव के दूसरे दिन मंगलवार की सांयकाल बेला में भगवान गोदा रंगमन्नार की सवारी रजत निर्मित हंस वाहन पर निकली। रथ मंडप से निकली यह सवारी बारहद्वारी स्थित मंडप तक पहुंची, जहां कुछ समय रुकने के बाद नगर भ्रमण के लिए रवाना हुई। मार्ग में जगह-जगह भक्तों ने भगवान की आरती कर पुष्प वर्षा से स्वागत किया।

धार्मिक मान्यता 

भगवान ने हंस रूप धारण कर ब्रह्माजी के प्रश्नों का उत्तर सनकादिक ऋषियों को दिया था। ब्रह्माजी ने कृतज्ञ होकर भगवान के इस रूप की स्तुति की। हंस को सारग्राही माना जाता है, इसलिए इस वाहन के दर्शन से भक्तों को शुद्ध, सात्विक और विवेकपूर्ण बुद्धि प्राप्त होने की मान्यता है।